अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि शिक्षा ही अनुभव को उत्पन्न करती है।
वास्तव में यह धारणा दार्शनिक दृष्टि से सही नहीं है।
1. अनुभव का स्रोत
अनुभव का जन्म प्रत्यक्ष वास्तविकता से होता है। चेतना और वस्तु के संपर्क से जो प्रत्यक्षता उत्पन्न होती है, वही अनुभव है।
2. शिक्षा की भूमिका
शिक्षा अनुभव को उत्पन्न नहीं करती, बल्कि मस्तिष्क को उसे समझने और व्यक्त करने की क्षमता देती है।
3. अभिव्यक्ति के उपकरण
शिक्षा के माध्यम से मस्तिष्क अनुभव को व्यक्त करने के लिए विभिन्न प्रकार के मॉडल बनाता है—
* भाषीय (Language)
* तार्किक (Logic)
* गणितीय (Mathematics)
4. विज्ञान का वास्तविक स्वरूप
विज्ञान और दर्शन वास्तव में अनुभव को व्यवस्थित करने के प्रयास हैं।
समीकरण, सिद्धान्त और परिभाषाएँ — ये अनुभव के मॉडल हैं, स्वयं अनुभव नहीं।
5. मूल सिद्धान्त
अनुभव वास्तविकता से जन्मता है;
शिक्षा उसे समझने और व्यक्त करने की भाषा देती है।