ईश्वर साक्षात्कार का विज्ञान

ईश्वर का अस्तित्व या उसका साक्षात्कार अवैज्ञानिक नहीं है। इस के सम्बन्ध में यह एक वैज्ञानिक प्रेक्षा है। विज्ञान के मूलभूत दिद्धान्त के अनुसार हर विचार, हर निश्चय और अनुभव एवं अनुभव्यमान वस्तु भी माडेल ही है। तो सृजक, रक्षक, संहारक, अनुग्राहक और निरतिशय तिरोधान सामर्थ्य से युक्त के रूप में नरन्तर चिन्तित ईश्वर मडेल रूप से व्यक्ति की अभीष्ट सिद्धि करता है, रक्षा भी करता है, ईस्ट रूप से उसका साक्षातकार भी होता है । यह बात वैज्ञानिक प्रेक्षा मेँ असम्भव नहीं है।

ईश्वर की रक्षात्मकता को लीजिये। घातक भी और घातकता का भी निश्चित माडेल है। उतने से घात कर्म और उसका परिणाम वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हो जाता है । विना मॉडल के पदार्थ ज्ञेय भी नहीं होता । पदार्थ का अस्तित्व मॉडल सापेक्ष ही है। तो रक्षक माडेल ईश्वर है। यह विज्ञान ने कहीँ नहीं कहा है कि मॉडल पहले है या पदार्थ? ईश्वर का मॉडल शास्त्रों से सिद्ध है।

क्या यह माडेल हर स्थिति में काम करता है या नहीं करता है? यह प्रश्न है। उत्तर: जैसे वैज्ञानिक मॉडल भी हर स्थिति में सटीक नहीं होते। प्रह्लाद ने अनन्य भाव से पुकारा वहाँ माडेल ने सही काम किया। दूसरे लोग पुकारते हैं , सायद अनन्य भाव की कोई कमी रहती होगी , सफल नहीं होता।

किन्तु वैज्ञानिक होने के लिये falsifiability भी होना चाहिए। क्या ईश्वर में falsifiability है?
उत्तर: अनन्य भाव का कोई निश्चित मात्रात्मक ( quantitative ) नर्म फिक्स नहीं है। गुणात्मक (qualitative) नर्म विज्ञान का विषय ही नहीं होता । तो अनुपलब्धता (तिरोधान स्वातंत्र्य) ही ईश्वर falsifiability है। और भी "श्रुत्वाऽपि बहुभिर् यो न लब्धः" यह वचन भी उसकी falsifiability में प्रमाण है। शास्त्रों के उहापोह ज्ञान वाले वाचक मॉडल को जानते हैं फिर भी साक्षात्कार नहीं होता। यदि ईश्वर सर्वत्र प्रत्यक्ष होता तो unfalsifiable का कोई विकल्प ही नहीं होता। ईश्वर का छिपा रहना (अनुपलब्धता) ही उसकी falsifiability है। छिपे रहने की स्वतंत्रता ही परीक्षण की संभावना को सिद्ध करता है।

विज्ञान में भी Quantum uncertainty: कण का "छिपा" होना ही उसकी प्रकृति है । Probabilistic models: निश्चितता नहीं, संभावना है। Observer effect: देखने से ही बदलाव आता है। ईश्वर के तिरोधान (छिपाव) ही उसके स्वतंत्रता का अंग है। यदि मशीन की तरह हमेशा प्रकट हो तो वह यांत्रिक होगा, चेतन नहीं होगा।

*ईश्वर-मॉडल में:*
अनुपलब्धता की संभावना ही falsifiability की गारंटी है।

*हमनें एतावता यह सिद्ध किया:*
ईश्वर का "न मिलना" मॉडल की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी *वैज्ञानिक प्रकृति* का प्रमाण है!

परिणाम की आवृत्ति भी है: प्रह्लाद, अर्जून, ध्रुव आदि अनेकों ने ईश्वर का साक्षत्कार किया भी है। मॉडल का सन्तुलित स्वरूप शास्त्रों में है। "जन्माद्यस्य यतः"इत्यादि।