मुझे एक साधारण ऑपरेशन की आवश्यकता पड़ी। लेकिन ऑपरेशन के लिए न तो पैसे थे और न ही कोई चिन्ता। क्योंकि योगक्षेम वहन करने वाला तो एक ही है। चिन्ता वो करें। मैं क्यों करूं? उन्होंने उचित स्थान, काल और पात्र का अचूक सम्बन्ध निर्मित किया। ऑपरेशन पूरी तरह मुफ्त हो गया, यह कहना होगा। मैं सोच रहा था कि अन्य रोगियों के साथ कैसे रहूंगा! लेकिन एकदम VIP Private रहने की व्यवस्था भी हो गई। मुझे नगण्य आनुषङ्गिक खर्च ही करना पड़ा। उसकी व्यवस्था भी उन्होंने ही की। जिन्होंने सहयोग किया वे उनके ही परमकृपापात्र हैं। जो किसी भी प्रकार का सहयोग नहीं कर पाए हैं वे भी उनके ही कृपापात्र हैं। क्यों कि अगति जितनी घनी होगी कृपा उतनी अघिक सुनिश्चित और निर्णायक होगी।
तो वक्तव्य का सन्दर्भ यहाँ भिन्न है। ऑपरेशन के लिए anesthesia दिया जाएगा। मेरे पास anesthesiologist आकर खड़े हुए। लेकिन मैं उनके शरीर में साक्षात महाकाली को ही देख रहा था। मैंने जाना कि कुछ ही समय में मैं बेहोश हो जाऊंगा। मैं सोचा कि घोर अज्ञान मूर्छा अवस्था में यदि प्राण अतिक्रमण करे तो आत्मा की गति क्या होगी? मन के निरन्तर सङ्कल्प-विकल्प के तुरन्त अवसान का एकमात्र माध्यम जप ही था। मैंने जप प्रारम्भ कर दिया। इसी बीच मैं बेहोश हो गया, यह जानने के बाद डॉक्टरों ने ऑपरेशन किया। जब मुझे होश आया तब साढ़े चार घण्टे से अधिक समय बीत चुका था। पहले पेट में प्रबल दर्द अनुभव कर मैंने painkiller देने के लिए कहा। painkiller लेने के बाद कुछ आराम मिला। इसके बाद मैंने अपनी पूर्वावस्था को याद करने की कोशिश की। बेहोश होने से पहले डॉक्टरों की चर्चा मुझे याद आई। मेरी ECG report को लेकर कुछ चिन्ता थी। लेकिन मैंने कहा था कि यह BP के fluctuation के कारण ही है। मेरे heart की कोई समस्या नहीं है। आप निर्भय होकर anesthesia दें।
लेकिन बेहोश होने के बाद मेरी चेतना अंधकार के गर्भ में नहीं थी। मैंने स्वयं को एक अलौकिक वातावरण में अनुभव किया। वह वही 'पितृलोक' था जिसके बारे में मैंने पहले संकेत किया है। मन के प्रबल आध्यात्मिक सात्त्विक संस्कार मूर्छा में भी भिन्न परिणाम देते हैं। इसी बीच मैंने महाकाली के अनुग्रह प्रकर्ष का प्रत्यक्ष अनुभव भी पाया था। इसके वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य पर कुछ अध्ययन कर रहा हूं। लिखकर भेज दूंगा।