जीवन कितिनी न्यारी है!
मन में हैँ अदम्य इच्छा,
फिर भी य्याग जारी है।।०
देखती आंख, चाहता मन,
ईप्सित की दूरी है।
सिद्धि की अवरोधी विधि
कैसी यह मजबूरी है।।१
विधिसे सन्न्यास लिये
सिद्धि को जो साधते।
जग में जाग्रत कहते लोग -
यह भी बड़ी चोरी है।।२
विधि बड़ा बन्धन है
आशु सिद्धि लाभ में।
विधि विना सिद्धि सारी
बाबाओं के धाम मेँ।।३
न भोगो यह भोग विष है
बाबा का उपदेश है।
अपनी काम-पूर्ति हेतु
भक्त-गण की क्यारी है।।४
अवधूत ज्ञानानन्द